कोमल, चंचल, कल्पना से परे
जल से शीतल, अग्नि से तेज़
किसे पता कैसी है तू
परी है तू,परी है तू
तू हँसे तो फूल खिले
रोये तू, आसमान फटे
कोमल ह्रदय की किस गली में
प्यार लिए बैठी है तू
परी है तू,परी है तू
उदास मन की गहराइयां
जब लेती हैं अंगडाइयां
सागर में ज्वार-भाते सा
तूफ़ान उठा लेती है तू
परी है तू,परी है तू
कोकिला सी तेरी बोली
आंखों में है शबनम
अधरों पे नाज़ुक बोल
सोने सी है चितवन
इस घोर अँधेरी दुनिया में
एक दीप जला देती है
तू परी है तू,परी है तू
जुल्फों को जब तू बांधे
हो जाता है सवेरा
जुल्फें तेरी जो उलझें हो
रात का अँधेरा
गुज़रे जिधर से जब भी
जादू चला जाती है तू
परी है तू,परी है तू
~अकेला~
So finally.... first comment from my side, asking more people to comment .....
ReplyDelete;)
hmmmm.....bhabhi ki kya khoob taareef ki hai...subhanallah
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