Sunday, August 05, 2012

तू वीर है तो वार कर ...


फिर तेज़ अपनी तलवार कर
तू वीर है तो वार कर
 
गिर जाये तो मरना नहीं
घिर जाये तो डरना नहीं
अभिमन्यु सा एक मोड़ ले,
इस चक्रव्यूह को तोड़ दे
फिर कदम बढ़ा, उठ हो खड़ा
दुश्मन की नींद हराम कर
तू वीर है तो वार कर

ये ज़िन्दगी एक जुंग सी
मिले जुले कुछ रंग सी
यहाँ लोग मिलेंगे अजब अजब
खेल खिलाएं गज़ब गज़ब
तुझे नीचा वो दिखायेन्गे
तेरा आत्म-विश्वास गिराएंगे
तू लपक झपक
चल अपनी डगर
बस एक लखश्य
ना अगर मगर
तू नज़रें तीर कमान कर
तू वीर है तू वार कर

तू निडर है, तू अमर है
जीत को कस ली कमर है
तेरे अंदर की जो आग है
वो देश का विश्वास है
जहाँ दुश्मन तुझसे  टकराएगा
तू तिरंगा वही लहराएगा
तेरा अंग अंग
माटी में रंग
तू नहीं अकेला
सब तेरे संग
छाती को गर्व से तान कर
तू वीर है तू वार कर 

2 comments:

  1. Wah!! Wah!! kyaa baat.... kyaa baat kyaaaaaaaaaa baaattt

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