Friday, December 21, 2012

13 दिसम्बर का दिन


आज 13 दिसम्बर है!!  

कुछ अर्सा सा गुज़र गया जब हम भी शेर बना फिरते थे, जब मन किया सिनेमा देखने चले गएजब देखो यारों से गप्पेवीकेंड पे बस खेल कूद और मस्ती, कभी रात रात भर सडको पे आवारगीबेफिक्र ज़िन्दगी की सुगबुगाहट लिए हर दिनहर शाम गुज़रा करती थी! ग़ज़लें भी हम आशीष 'अकेला' के नाम से ही पिरोया करते थे!

माँ बाप ने कहा सेटल हो जाओ - उनकी बात हमें अच्छी लगी, मन में लड्डू फूट पड़े और हम शादी करने दौड़ पड़े! वो दिन भी आया और लो हो गयी शादी - अरेंज्ड मैरिज थी हमारी!!

शुरू में बड़ी मिक्स सी फीलिंग हुईटाइम पे घर जाना पड़ेगा यह बात मन को कसोटती पर कोई घर पे इंतज़ार कर रहा है यह जानके मन गदगद हो पड़ता! कुछ महीने बीते और हम इक अलग सी लाइफ में सेटल होने लगेहमारे कुछ विचार मिलते पर ज़्यादातर टकराने लगे! दिन गुज़रे और हमारी हेकड़ी कम होती गयी और वो दिन जल्दी ही आये जब सारी बेहेस बंद हो गयी - अब वो हर बार जीत जाती और हमें मुंह की खानी पड़ती...धीरे धीरे आदत पड़ गयी - चलो अच्छा है जल्दी सब समझ में  गया!

बीते सालों में ट्यूनिंग सी सेट हो गयी हैउनको क्या अच्छा लगेगा क्या बुरा पूरी तरह तो समझ नहीं पाए ...आगे भी उम्मीद कम ही है...पर हाँ किस हालात में कब चुप रहना है और कब चुप रहना है (गलती से रिपीट नहीं है - यह दो अलग अलग एक्शन हैं)  यह थोडा पता चल गया है और सच मानिए यह किसी जीत से कम नहीं है!

आज जब मैं पीछे मुडके देखता हूँ तो पाता हूँ की उन सारी खट्टी मीठी यादों कोसाथ बिताये सुख दुःख के लम्हों को, वो प्यार वो तकरार की बातों को मिलाकर जो इक तस्वीर बनती है वो बड़ी ही अद्भुत है, बड़ी निराली है! कुछ ऐसा एहसास कराती है जो बरसों की तपस्या के बाद ही प्राप्त होता है!

यह सारे इमोशंस  तो आज बाहेर आने ही थे, भई आज ठीक 6 साल जो हो गए हैं हमारी शादी को....!! लेट्स सेलिब्रेट थिस ओकैशन - यह कहते हुए मेरे एक्सप्रेशन कैसे होंगे यह मैं आप ज्ञानी और गुनी लोगों पे छोड़ता हूँ :-)

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